Bharat Mata Mandir


भारत माता मंदिर: राष्ट्रवाद और आस्था का अनूठा संगम

भारत एक ऐसा देश है जहाँ अनेकता में एकता का भाव हमेशा से रहा है। यहाँ देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के लिए असंख्य मंदिर हैं, लेकिन कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जो अपनी अनोखी अवधारणा और राष्ट्रीय भावना के लिए जाने जाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर है, "भारत माता मंदिर"। यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि देश के प्रति सम्मान और प्रेम की एक जीवंत अभिव्यक्ति है। भारत में दो प्रमुख भारत माता मंदिर हैं - एक वाराणसी में और दूसरा हरिद्वार में। दोनों का अपना-अपना ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है।

1. वाराणसी का भारत माता मंदिर: एक भौगोलिक तीर्थ

वाराणसी, जिसे काशी भी कहते हैं, में स्थित भारत माता मंदिर अपनी तरह का एक अनूठा मंदिर है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ किसी देवी या देवता की मूर्ति नहीं है, बल्कि अविभाजित भारत का एक विशाल भौगोलिक मानचित्र स्थापित है।

  • इतिहास और निर्माण: इस मंदिर का निर्माण स्वतंत्रता सेनानी और काशी विद्यापीठ के संस्थापक बाबू शिव प्रसाद गुप्त ने करवाया था। बताया जाता है कि 1913 में कराची कांग्रेस अधिवेशन से लौटते समय मुंबई में मिट्टी से बने अखंड भारत के नक्शे को देखकर उन्हें इस मंदिर को बनाने का विचार आया। मंदिर का निर्माण कार्य 1918 में शुरू हुआ और लगभग 6 साल में पूरा हुआ। इसका उद्घाटन 25 अक्टूबर 1936 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने किया था। गांधीजी ने अपने संबोधन में कहा था कि यह मंदिर सभी धर्मों, जातियों और विश्वासों के लोगों के लिए एक सार्वदेशिक मंच का रूप ग्रहण करेगा।

  • विशेषताएँ:

    • मकराना संगमरमर का मानचित्र: मंदिर के गर्भ गृह में 11 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा अखंड भारत का एक विशाल त्रिआयामी (3D) मानचित्र है, जिसे मकराना संगमरमर के 762 टुकड़ों को जोड़कर बनाया गया है।

    • बारीक नक्काशी: इस मानचित्र में पहाड़, पठार, नदियाँ, झीलें और महासागरों को बड़ी ही बारीकी से दर्शाया गया है। इसमें हिमालय की चोटियों और समुद्र तल से ऊँचाई को भी सटीक रूप से उकेरा गया है।

    • राष्ट्रीय चेतना का केंद्र: यह मंदिर आजादी की लड़ाई के दौरान क्रांतिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत था। चंद्रशेखर आज़ाद और सुभाष चंद्र बोस जैसे महान क्रांतिकारी यहाँ आकर मां भारती की आराधना करते थे। मंदिर के प्रवेश द्वार पर राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' और राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की कविताएं भी अंकित हैं, जो देशभक्ति की भावना को और भी मजबूत करती हैं।

2. हरिद्वार का भारत माता मंदिर: बहुमंजिला राष्ट्रीय स्मारक

गंगा के तट पर स्थित हरिद्वार का भारत माता मंदिर एक आठ मंजिला मंदिर है, जो अपने आप में भारत का एक विशाल दर्शन कराता है। यह मंदिर राष्ट्र के शूरवीरों, संतों और वीरांगनाओं को समर्पित है।

  • इतिहास और निर्माण: इस मंदिर की स्थापना 1983 में प्रसिद्ध धार्मिक गुरु स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने की थी। इसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने किया था। यह मंदिर 'मदर इंडिया' मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

  • विशेषताएँ और संरचना:

    • आठ मंजिला इमारत: यह मंदिर 180 फुट ऊँचा है और इसकी प्रत्येक मंजिल का एक अलग महत्व है।

    • पहली मंजिल: भारत माता की विशाल मूर्ति स्थापित है, जो देश की सामूहिक चेतना का प्रतीक है।

    • दूसरी मंजिल (शूर मंदिर): यहाँ भारत के महान शूरवीरों और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई है।

    • तीसरी मंजिल (मातृ मंदिर): यह मंजिल भारत की नारी शक्ति और महान वीरांगनाओं को समर्पित है।

    • चौथी मंजिल (संत मंदिर): इसमें भारत के महान संतों और धार्मिक नेताओं की मूर्तियाँ हैं।

    • पाँचवी मंजिल: यहाँ भारत के विभिन्न राज्यों की संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाया गया है।

    • छठी और सातवीं मंजिल: ये मंजिलें देवी शक्ति और भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों को समर्पित हैं।

    • आठवीं मंजिल: सबसे ऊपर की मंजिल पर भगवान शिव का मंदिर है, जहाँ से हिमालय और हरिद्वार का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है।

भारत माता मंदिर, चाहे वह वाराणसी में हो या हरिद्वार में, सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं हैं। वे राष्ट्रीय एकता, अखंडता और देशभक्ति के प्रतीक हैं। ये मंदिर हमें याद दिलाते हैं कि हमारा राष्ट्र ही हमारी सबसे बड़ी देवी है और इसकी सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है। ये मंदिर हमारी गौरवशाली विरासत, संघर्ष और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं, और हर भारतीय को राष्ट्र प्रेम की भावना से भर देते हैं।