Lucknow

 


नवाबों का शहर: लखनऊ

लखनऊ, जिसे अक्सर "नवाबों का शहर" और "शिराज़-ए-हिंद" कहा जाता है, उत्तर प्रदेश की राजधानी है। यह शहर अपने समृद्ध इतिहास, वास्तुकला, कला, और सबसे बढ़कर अपनी अद्वितीय तहज़ीब (शिष्टाचार) के लिए जाना जाता है। गंगा-जमुनी तहज़ीब की संस्कृति यहाँ की पहचान है, जहाँ हिंदू और मुस्लिम संस्कृतियों का एक सुंदर संगम देखने को मिलता है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत

लखनऊ का इतिहास अवध के नवाबों के शासनकाल से गहरा जुड़ा हुआ है। 18वीं और 19वीं शताब्दी में नवाबों ने इस शहर को कला, संस्कृति और वास्तुकला का एक प्रमुख केंद्र बना दिया। नवाबों के संरक्षण में यहाँ वास्तुकला की एक नई शैली विकसित हुई, जिसे अवधी वास्तुकला कहा जाता है। यह शैली मुगल और यूरोपीय वास्तुकला का एक खूबसूरत मिश्रण है।

प्रमुख दर्शनीय स्थल

लखनऊ की वास्तुकला उसकी शान है। यहाँ की प्रमुख इमारतों में शामिल हैं:

  • बड़ा इमामबाड़ा: नवाब आसफ़-उद-दौला द्वारा निर्मित यह भव्य स्मारक अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। इसके भीतर एक विशाल हॉल है जिसे किसी भी स्तंभ का सहारा नहीं मिला है। इसका सबसे बड़ा आकर्षण "भूल भुलैया" है, जो एक जटिल भूलभुलैया है और पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है।
  • छोटा इमामबाड़ा: इसे "हुसैनबाद इमामबाड़ा" भी कहते हैं। यह नवाब मुहम्मद अली शाह द्वारा निर्मित एक और शानदार स्मारक है, जो अपनी सुंदर सजावट और बारीक कारीगरी के लिए जाना जाता है।
  • रूमी दरवाज़ा: 60 फीट ऊँचा यह विशाल दरवाज़ा लखनऊ का एक प्रतिष्ठित प्रतीक है। इसे तुर्की गेट के नाम से भी जाना जाता है और यह शहर के भव्य प्रवेश द्वार के रूप में खड़ा है।

लखनवी व्यंजन (कबाब और बिरयानी)

लखनऊ की पहचान उसके स्वादिष्ट व्यंजनों से भी है। यहाँ का भोजन अवधी शैली में तैयार किया जाता है, जो अपने धीमी-आँच पर पकाने की विधि (दम) के लिए प्रसिद्ध है।

  • कबाब: यहाँ के टुंडे कबाबी और गलावटी कबाब दुनिया भर में मशहूर हैं। ये कबाब इतने नरम होते हैं कि मुँह में रखते ही घुल जाते हैं।
  • बिरयानी: लखनऊ की बिरयानी अपनी खास खुशबू और स्वाद के लिए जानी जाती है, जिसमें चावल और मांस को मसालों के साथ दम पर पकाया जाता है।

कला, हस्तशिल्प और तहज़ीब

लखनऊ चिकनकारी की कढ़ाई के लिए प्रसिद्ध है। यह एक बारीक और सुंदर हस्तशिल्प है जो यहाँ की कलात्मक विरासत को दर्शाता है। इसके अलावा, यहाँ की ज़री-ज़र्दोज़ी और अन्य हस्तकलाएँ भी बहुत लोकप्रिय हैं।

लेकिन, लखनऊ की सबसे बड़ी पहचान उसकी तहज़ीब है। यहाँ के लोग अपनी भाषा (उर्दू), विनम्रता और शिष्टाचार के लिए जाने जाते हैं। "पहले आप" की संस्कृति यहाँ के व्यवहार में गहराई से बसी हुई है।

आज का लखनऊ पुरानी तहज़ीब को आधुनिकता के साथ जोड़ रहा है। गोमती नदी के किनारे विकास हो रहा है, मेट्रो सेवाएँ शुरू हो गई हैं और नए मॉल्स बन रहे हैं, लेकिन शहर की आत्मा - उसकी विनम्रता, संस्कृति और गौरव - आज भी बरकरार है।