Nawab Wajid Ali Shah Zoological Garden

 

नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान, लखनऊ

लखनऊ, जिसे 'नवाबों का शहर' कहा जाता है, अपनी ऐतिहासिक इमारतों, अदब और तहज़ीब के साथ-साथ अपने हरे-भरे उद्यानों और प्राणी उद्यानों के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं में से एक है नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान, जो पहले लखनऊ चिड़ियाघर के नाम से जाना जाता था। यह न सिर्फ एक मनोरंजक स्थल है, बल्कि शिक्षा, संरक्षण और अनुसंधान का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है।


इतिहास और स्थापना

इस प्राणी उद्यान की स्थापना 29 नवंबर, 1921 को वेल्स के राजकुमार की लखनऊ यात्रा के दौरान की गई थी। उस समय इसे वेल्स के राजकुमार का प्राणि उद्यान (Prince of Wales Zoological Garden) नाम दिया गया था। 2015 में, उत्तर प्रदेश सरकार ने इसका नाम बदलकर लखनऊ के अंतिम नवाब, नवाब वाजिद अली शाह के नाम पर रख दिया, जिन्होंने कला, संस्कृति और जानवरों के प्रति अपने प्रेम के लिए जाना जाता है।

चिड़ियाघर की स्थापना का उद्देश्य लखनऊ के बच्चों को वन्यजीवों के बारे में शिक्षित करना और उन्हें प्रकृति से जोड़ना था। शुरुआत में, इसमें केवल कुछ ही जानवर थे, लेकिन समय के साथ इसका विस्तार होता गया और यह भारत के सबसे बड़े और सबसे पुराने चिड़ियाघरों में से एक बन गया।


प्रमुख आकर्षण और जानवर

यह प्राणी उद्यान 71.6 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें 100 से अधिक प्रजातियों के लगभग 900 जानवर हैं। यहाँ पर आप विभिन्न प्रकार के स्तनधारी, पक्षी और सरीसृप देख सकते हैं।

  • स्तनधारी (Mammals): यहाँ पर रॉयल बंगाल टाइगर, सफेद बाघ, हिमालयी काला भालू, एशियाई शेर, तेंदुआ, दरियाई घोड़ा और विभिन्न प्रकार के हिरण जैसे सांभर, चीतल और बारहसिंगा पाए जाते हैं। इसके अलावा, यहाँ हाथी और जिराफ भी हैं, जो बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं।
  • पक्षी (Birds): पक्षी प्रेमियों के लिए यह जगह स्वर्ग जैसी है। यहाँ पर रंग-बिरंगे तोते, मोर, हॉर्नबिल, सारस, फ्लेमिंगो और कई अन्य विदेशी पक्षियों की प्रजातियाँ हैं।
  • सरीसृप (Reptiles): सरीसृप खंड में विभिन्न प्रकार के साँप, मगरमच्छ और घड़ियाल हैं। यहाँ पर एक अलग मगरमच्छ प्रजनन केंद्र भी है, जहाँ लुप्तप्राय घड़ियालों के संरक्षण का काम किया जाता है।


संरक्षण और शिक्षा का केंद्र

नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं है, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहाँ पर कई लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए प्रजनन कार्यक्रम (Breeding Programs) चलाए जाते हैं, जैसे कि सफेद बाघ और घड़ियाल।

इसके अलावा, यह चिड़ियाघर बच्चों और वयस्कों के लिए शैक्षिक कार्यक्रम भी आयोजित करता है। यहाँ पर समय-समय पर वन्यजीव संरक्षण कार्यशालाएं, प्रकृति शिविर और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य लोगों को वन्यजीवों के महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में शिक्षित करना है।


अन्य सुविधाएँ

प्राणी उद्यान में आगंतुकों के लिए कई सुविधाएँ उपलब्ध हैं:

  • टॉय ट्रेन (Toy Train): यह बच्चों और वयस्कों के लिए एक मजेदार सवारी है, जो पूरे चिड़ियाघर का चक्कर लगाती है। यह उन लोगों के लिए भी सुविधाजनक है जो चिड़ियाघर के विशाल क्षेत्र को पैदल नहीं घूमना चाहते।
  • राज्य संग्रहालय (State Museum): चिड़ियाघर के परिसर में लखनऊ का राज्य संग्रहालय भी स्थित है, जहाँ प्राचीन कलाकृतियाँ, हथियार, सिक्के और अवधी संस्कृति से संबंधित अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं प्रदर्शित हैं।
  • कैंटीन और जलपान गृह (Canteen and Refreshment): पूरे चिड़ियाघर में कई जलपान केंद्र हैं, जहाँ आगंतुक आराम कर सकते हैं और नाश्ता कर सकते हैं।


भ्रमण का समय और टिकट

यह प्राणी उद्यान मंगलवार से रविवार तक सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक खुला रहता है। सोमवार को यह बंद रहता है। टिकट की कीमतें वयस्कों और बच्चों के लिए अलग-अलग हैं और कुछ सुविधाओं जैसे टॉय ट्रेन या बैटरी से चलने वाली गाड़ी के लिए अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है।

नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान, लखनऊ एक ऐसा स्थान है जहाँ आप न सिर्फ जानवरों को करीब से देख सकते हैं, बल्कि प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना भी महसूस कर सकते हैं। यह परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने, सीखने और प्रकृति की सुंदरता का अनुभव करने के लिए एक आदर्श जगह है।