
चंद्रिका देवी मंदिर, लखनऊ: आस्था और इतिहास का संगम
लखनऊ शहर से लगभग 28 किलोमीटर दूर, बख्शी का तालाब (बीकेटी) तहसील में, गोमती नदी के किनारे एक प्राचीन और पवित्र स्थल है - चंद्रिका देवी मंदिर। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्तों की गहरी आस्था, लोक कथाओं और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र है।
इतिहास और लोक कथाएं
चंद्रिका देवी मंदिर का इतिहास सदियों पुराना माना जाता है। इस मंदिर की उत्पत्ति को लेकर कई लोक कथाएं प्रचलित हैं।
- लक्ष्मण से जुड़ाव: माना जाता है कि सतयुग में, जब भगवान राम अयोध्या के राजा थे, उनके भाई लक्ष्मण के पुत्र, राजकुमार चंद्रकेतु ने गोमती नदी के तट पर एक अश्वमेध यज्ञ किया था। यज्ञ के दौरान, उन्होंने एक भव्य मंदिर की स्थापना की और माता चंद्रिका देवी की मूर्ति को प्रतिष्ठित किया।
- घटोत्कच से जुड़ाव: एक अन्य कथा के अनुसार, महाभारत काल में, पांडवों में से एक, भीम के पुत्र घटोत्कच की माता ने इस स्थान पर एक मंदिर की स्थापना की थी।
- प्राचीनता के प्रमाण: इस स्थान को "महिषासुर मर्दिनी" और "घटिका देवी" के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर परिसर में एक प्राचीन कुआँ और कुछ अन्य संरचनाएं मिली हैं, जो इसकी ऐतिहासिकता की पुष्टि करती हैं।
मंदिर की संरचना और विशेषताएँ
चंद्रिका देवी मंदिर एक विशाल और शांत परिसर में स्थित है। मंदिर की मुख्य मूर्ति महिषासुर मर्दिनी के रूप में है, जो देवी दुर्गा का एक रूप है।
- पवित्र कुंड: मंदिर के पास एक पवित्र कुंड है, जिसे गोमती कुंड के नाम से जाना जाता है। भक्त यहाँ डुबकी लगाते हैं, जिसे शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस कुंड के पानी में औषधीय गुण हैं।
- पुराना बरगद का पेड़: मंदिर परिसर में एक बहुत पुराना बरगद का पेड़ है, जिसके नीचे कई श्रद्धालु बैठकर ध्यान करते हैं। यह पेड़ मंदिर की प्राचीनता का एक और प्रतीक है।
- शांत वातावरण: गोमती नदी के किनारे स्थित होने के कारण, मंदिर का वातावरण बहुत शांत और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। यह स्थान धार्मिक और आध्यात्मिक शांति के लिए एक आदर्श जगह है।
प्रमुख त्यौहार और मेले
चंद्रिका देवी मंदिर में साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन कुछ विशेष अवसरों पर यहाँ भारी भीड़ होती है:
- नवरात्रि: यह मंदिर नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से भव्य दिखता है। इन नौ दिनों में, यहाँ विशेष पूजा-अर्चना, आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।
- पूर्णिमा: प्रत्येक पूर्णिमा पर, खासकर अमावस्या के बाद पड़ने वाली पूर्णिमा को, यहाँ एक बड़ा मेला लगता है। इस मेले में दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं।
कैसे पहुँचें?
चंद्रिका देवी मंदिर लखनऊ से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
- सड़क मार्ग: लखनऊ से यह मंदिर लगभग 28 किलोमीटर दूर है। आप टैक्सी, ऑटो-रिक्शा या निजी वाहन से आसानी से पहुँच सकते हैं। यह बीकेटी-सीतापुर राजमार्ग से थोड़ा हटकर है।
- रेल मार्ग: लखनऊ रेलवे स्टेशन निकटतम प्रमुख स्टेशन है। वहाँ से आप टैक्सी किराए पर ले सकते हैं।
- हवाई मार्ग: चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लखनऊ हवाई अड्डा) निकटतम हवाई अड्डा है। हवाई अड्डे से मंदिर तक पहुँचने में लगभग 1-1.5 घंटे लगते हैं।
चंद्रिका देवी मंदिर लखनऊ का एक ऐसा आध्यात्मिक स्थल है जहाँ आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल भक्तों के लिए एक तीर्थ है, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक शांत शरणगाह है जो शहर की भीड़-भाड़ से दूर सुकून चाहते हैं।
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